डॉक्टर दिल पर लगाता है निशान, जल्लाद बरसाता है गोलियां… यमन में मौत की सबसे खौफनाक सजा का सामना करेंगी निमिषा प्रिया

केरल की नर्स निमिषा प्रिया यमन में मौत की सजा का सामना कर रही हैं। 16 जुलाई को उन्हें खौफनाक तरीके से मौत दी जा सकती है। जानें पूरी कहानी, यमन में मौत की सजा का तरीका और भारत सरकार की कोशिशें।

डॉक्टर दिल पर लगाता है निशान, जल्लाद बरसाता है गोलियां… यमन में मौत की सबसे खौफनाक सजा का सामना करेंगी निमिषा प्रिया
निमिषा प्रिया

केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली निमिषा प्रिया, एक नर्स, की जिंदगी इस वक्त यमन की जेल में मौत के साए में गुजर रही है। 16 जुलाई 2025 को उन्हें भयानक तरीके से मौत की सजा (execution by firing squad) दी जा सकती है।

निमिषा 2008 में नर्स के तौर पर यमन की राजधानी सना (Sana’a, Yemen) गईं। 2014 में परिवार भारत लौट आया लेकिन वे यमन में ही रहीं और एक क्लिनिक शुरू किया। लेकिन इसी दौरान उनकी जिंदगी में आया यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी, जिनके साथ साझेदारी ने एक खौफनाक मोड़ ले लिया।

मौत की वजह: इंजेक्शन से हत्या और शव के टुकड़े
आरोप है कि 2017 में तलाल ने निमिषा का पासपोर्ट और पैसे जब्त कर लिए। इसे वापस पाने के लिए उन्होंने उसे बेहोश करने की कोशिश की। लेकिन गलत डोज की वजह से तलाल की मौत हो गई। शव को टुकड़ों में काटकर पानी की टंकी में फेंकने का आरोप भी उन पर साबित हुआ।

2018 में उन्हें हत्या का दोषी ठहराया गया और 2020 में सजा-ए-मौत (death sentence) सुनाई गई। 2023 में उनकी अपील भी खारिज हो चुकी है।

यमन में मौत की सजा का तरीका: दिल दहला देने वाला
यमन में पहले फांसी (hanging) या सिर कलम (beheading) होता था, लेकिन अब सजा का तरीका और ज्यादा डरावना हो चुका है। 
- दोषी को गलीचे पर उल्टा लिटाया जाता है। 
- डॉक्टर दिल की जगह मार्क करता है। 
- जल्लाद ऑटोमेटिक राइफल से कई गोलियां पीठ में उतारता है, जिससे रीढ़ टूटकर दिल चिथड़े हो जाता है।
- कभी-कभी कोड़ों की मार भी होती है।

यह सजा वहां के शरिया कानून (Sharia Law in Yemen) के तहत हत्या, बलात्कार, आतंकवाद, व्यभिचार, समलैंगिकता, धर्मत्याग, ड्रग्स तस्करी और जासूसी जैसे अपराधों के लिए दी जाती है।

भारत सरकार की कोशिश और ‘ब्लड मनी’ का प्रस्ताव
भारत सरकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। निमिषा की मां प्रेमा कुमारी एक साल से यमन में डटी हुई हैं।

‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ ने तलाल के परिवार को 10 लाख डॉलर ब्लड मनी (Diyat), मुफ्त इलाज और यात्रा का ऑफर दिया है। अगर तलाल का परिवार मुआवजा स्वीकार कर ले, तो शरिया कानून के मुताबिक निमिषा की जान बच सकती है। लेकिन अब तक तलाल का परिवार तैयार नहीं हुआ। हूती विद्रोहियों के कब्जे और भारत-यमन के औपचारिक संबंध न होने से मामला उलझा हुआ है।

आखिरी उम्मीद: कोई चमत्कार हो जाए…
अब सारी उम्मीदें 16 जुलाई से पहले दियात (blood money settlement) पर टिक गई हैं। भारत सरकार, कार्यकर्ता और पूरा देश दुआ कर रहा है कि कोई चमत्कार हो और निमिषा की जिंदगी बच जाए।