बिहार में चुनाव हार के बाद प्रशांत किशोर का बड़ा कदम, 24 घंटे के मौन से निकला नया राजनीतिक रोडमैप

2025 चुनाव हार के बाद प्रशांत किशोर ने भितिहरवा आश्रम में 24 घंटे का मौन रखकर आत्ममंथन किया और ‘बिहार नवनिर्माण संकल्प अभियान’ शुरू करने का ऐलान किया।

बिहार में चुनाव हार के बाद प्रशांत किशोर का बड़ा कदम, 24 घंटे के मौन से निकला नया राजनीतिक रोडमैप
Prashant Kishor

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने के बाद जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने हार की पूरी जिम्मेदारी खुद पर ली और इसके बाद गुरुवार को वे भितिहरवा आश्रम पहुंचे—वही ऐतिहासिक जगह, जहां से उनकी राजनीति की शुरुआत हुई थी। यहां उन्होंने 24 घंटे का मौन उपवास रखकर आत्ममंथन किया और अपने राजनीतिक भविष्य पर गंभीर चिंतन किया।

मौन उपवास और आत्मचिंतन
शुक्रवार को मौन व्रत समाप्त करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीके ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि गांधीवादी विचारों से प्रेरित होकर वे दोबारा आंदोलन की राह पर लौट रहे हैं। 

पीके ने घोषणा की कि 15 जनवरी से वे बिहार के सभी 1,18,000 वार्डों में जाकर जनता से सीधे संवाद करेंगे। यह अभियान ‘बिहार नवनिर्माण संकल्प अभियान’ के नाम से चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से वे सरकार के अधूरे वादों को जनता तक ले जाएंगे।

सरकार पर सीधा हमला: '10,000 रुपये देकर वोट खरीदे गए'
प्रशांत किशोर ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले 10,000 रुपये देकर गरीबों का वोट खरीदा गया, जबकि 2 लाख रुपये देने का वादा कर जनता को भ्रमित किया गया।

उन्होंने कहा कि इस चुनाव में पैसे के दम पर वोट खरीदने का खुला खेल चलाया गया। नीतीश कुमार पर टिप्पणी करते हुए पीके ने कहा कि अब उन्हें ईमानदार मुख्यमंत्री समझना मुश्किल है, क्योंकि सरकार में कथित अपराधिक छवि वाले लोगों को मंत्री बनाया गया।

राजनीतिक आरोप और नीतीश कुमार पर निशाना
मौन व्रत के बाद पीके ने अपने निजी जीवन से जुड़ा सबसे बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि वे अपनी कुल कमाई का 90% हिस्सा जन सुराज को दान करेंगे।

इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी घोषणा की कि पिछले 20 वर्षों में जो भी संपत्ति अर्जित की है, परिवार के घर को छोड़कर बाकी संपत्ति संगठन को समर्पित कर दी जाएगी।

समर्थकों से अपील: 'हर जनसुराजी साल में 1000 रुपये दे'
प्रशांत किशोर ने समर्थकों से साफ अपील की कि आंदोलन को मजबूत करना है तो हर सदस्य साल में कम से कम 1000 रुपये संगठन के लिए दें। उन्होंने कहा, चुनाव हारने से लड़ाई खत्म नहीं होती। हमने शुरुआत जिस आश्रम से की थी, वहीं लौटकर नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने का समय है।

'जन सुराज बनेगा बड़ी ताकत' — पीके का नया विजन
पीके ने अंत में विश्वास जताया कि आने वाले समय में जन सुराज बिहार की राजनीति में एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। उनके अनुसार हार सिर्फ एक चरण है, जबकि असली लड़ाई अभी शुरू हुई है।