तुर्की में फिर कांपी धरती! 6.1 तीव्रता के भूकंप से दहशत, तीन इमारतें ढहीं — कई शहरों में महसूस हुए झटके
तुर्की में सोमवार को 6.1 तीव्रता का भूकंप आया। तीन इमारतें ढह गईं, इस्तांबुल समेत कई शहरों में झटके महसूस हुए। सरकार ने राहत कार्य शुरू किए।
तुर्की एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों से हिल गया। सोमवार सुबह रिक्टर पैमाने पर 6.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसका केंद्र बालिकेसिर प्रांत के सिंदिरगी शहर में बताया जा रहा है। झटके इतने तीव्र थे कि कई इलाकों में लोग घरों से बाहर निकल आए। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, तीन पुरानी और क्षतिग्रस्त इमारतें ढह गईं, हालांकि अब तक किसी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है।
भूकंप का असर कई शहरों तक
तुर्की की आपदा एवं आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (AFAD) ने बताया कि भूकंप के झटके देश के कई हिस्सों — इस्तांबुल, बुरसा, मनिसा और इजमिर — तक महसूस किए गए। अधिकारियों के अनुसार राहत दल प्रभावित इलाकों में तुरंत भेजे गए हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़ी तबाही या जनहानि की आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आई है।
भूकंप प्रवण क्षेत्र पर बसा है तुर्की
भौगोलिक रूप से तुर्की दो प्रमुख टेक्टॉनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित है, जिसके कारण यहां भूकंप बार-बार आते रहते हैं। यह क्षेत्र “Seismic Hot Zone” के नाम से जाना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बालिकेसिर क्षेत्र में लगातार छोटे झटके महसूस किए जा रहे हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि ज़मीन के नीचे की हलचल अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी तबाही
सिंदिरगी क्षेत्र में इससे पहले भी कई बार धरती कांप चुकी है। अगस्त 2024 में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और दर्जनों घायल हुए थे। सितंबर 2024 में भी बालिकेसिर में 4.9 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे। और अगर पीछे जाएं तो 2023 में 7.8 तीव्रता के भूकंप ने तुर्की में 53,000 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी, जबकि 11 प्रांतों में लाखों इमारतें मलबे में बदल गई थीं। उस वक्त पड़ोसी सीरिया में भी लगभग 6,000 लोगों की मौत हुई थी।
राष्ट्रपति एर्दोगान ने दी प्रतिक्रिया
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगान ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और सभी नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने देशवासियों से शांत रहने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की।
लगातार झटकों से बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से छोटे झटके आम हो गए हैं, जिससे लोग हर बार डर के साए में जी रहे हैं। कई परिवार अब भी अपने घरों में सोने से परहेज़ कर रहे हैं और खुले मैदानों में रात बिता रहे हैं।


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