मोबाइल की स्क्रीन पर मंडराता खतरा: यूपी DGP राजीव कृष्णा की साइबर सुरक्षा को लेकर सख्त चेतावनी

UP DGP Rajeev Krishna ने मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। जानिए यूपी पुलिस की नई साइबर रणनीति और 1930 हेल्पलाइन की अहमियत।

मोबाइल की स्क्रीन पर मंडराता खतरा: यूपी DGP राजीव कृष्णा की साइबर सुरक्षा को लेकर सख्त चेतावनी
UP DGP Rajeev Krishna

मोबाइल फोन आज हमारी जिंदगी का सबसे भरोसेमंद साथी बन चुका है। मनोरंजन, बैंकिंग, खरीदारी और संवाद—हर जरूरत इसी छोटे से उपकरण पर निर्भर है। लेकिन उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा ने आगाह किया है कि यही मोबाइल फोन अब अपराधियों के लिए सबसे आसान रास्ता भी बन गया है। इंटरनेट के इस दौर में साइबर ठगी और ब्लैकमेलिंग जैसे अपराध तेजी से बढ़े हैं, जो आम नागरिक ही नहीं बल्कि पुलिस प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

डिजिटल इंडिया और साइबर क्राइम का बढ़ता दायरा
डीजीपी राजीव कृष्णा का मानना है कि साइबर अपराध दरअसल हमारी आधुनिक और डिजिटल जीवनशैली का ही एक साइड इफेक्ट है। कोविड-19 महामारी से पहले तक ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल पेमेंट और QR कोड का इस्तेमाल सीमित लोगों तक ही था। लेकिन लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के दौर ने पूरे देश को डिजिटल लेनदेन की ओर मोड़ दिया। आज स्थिति यह है कि भारत में सड़क किनारे मूंगफली बेचने वाला भी QR कोड से भुगतान स्वीकार कर रहा है। तकनीक ने जीवन आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ ही ठगों को भी नए हथियार दे दिए हैं।

यूपी पुलिस की बदली हुई साइबर रणनीति
उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस बदलते खतरे को गंभीरता से लेते हुए अपनी व्यवस्था में बड़े सुधार किए हैं। डीजीपी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले प्रदेश में केवल दो साइबर थाने थे, लेकिन अब सभी 75 जिलों में साइबर थाने स्थापित किए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, हर सामान्य थाने में साइबर हेल्प डेस्क भी बनाई गई है, ताकि पीड़ितों को तुरंत मदद मिल सके। यह बदलाव केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके ठोस परिणाम भी सामने आए हैं।

समय पर शिकायत ही सबसे बड़ा बचाव
पुलिस की इस सक्रियता का नतीजा यह रहा कि वर्ष 2025 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच करीब 326 करोड़ रुपये की ठगी गई रकम को समय रहते फ्रीज कराया गया। डीजीपी राजीव कृष्णा ने आम लोगों से अपील की है कि जैसे ही किसी तरह का साइबर फ्रॉड हो, बिना देर किए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं, क्योंकि इसी दौरान अपराधियों के बैंक खातों को ब्लॉक कर ठगी की रकम को रोका जा सकता है।