मंत्री प्रतिभा शुक्ला के पति का डिप्टी CM ब्रजेश पाठक पर हमला, बोले– 'ब्राह्मण समाज के साथ न्याय नहीं कर रहे'

UP में BJP नेता प्रतिभा शुक्ला के पति अनिल शुक्ला ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पर समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया। जानिए पूरी सियासी हलचल।

मंत्री प्रतिभा शुक्ला के पति का डिप्टी CM ब्रजेश पाठक पर हमला, बोले– 'ब्राह्मण समाज के साथ न्याय नहीं कर रहे'
अनिल शुक्ला वारसी

कानपुर देहात में बीजेपी के अंदर उठी असंतोष की लहर अब खुलकर सामने आ गई है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री प्रतिभा शुक्ला के पति अनिल शुक्ला वारसी ने खुलेआम पार्टी के कद्दावर नेता और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

धरना देने के बाद अब उन्होंने ब्राह्मण समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पाठक को अपने समाज की रक्षा करने की हिदायत दे डाली। साथ ही स्थानीय सांसद भोला सिंह को लेकर भी तीखे और चुनौतीपूर्ण बयान दिए।

क्या कहा अनिल शुक्ला ने?
- ब्रजेश पाठक अपने पद और समाज दोनों के साथ न्याय नहीं कर रहे।
- ब्राह्मण समाज के लोग लगातार उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, पुलिस भी उनके साथ भेदभाव कर रही है।
- पाठक जी को धरने से पहले फोन किया गया था, लेकिन बात नहीं कराई गई। बाद में उन्होंने खुद फोन किया।
- अगर मौका मिला होता, तो मैं खुद चुनाव लड़ता और सांसद भोला सिंह को उनकी औकात दिखा देता।

मंत्री प्रतिभा शुक्ला की चेतावनी: "अगर इंस्पेक्टर पर कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा धरना दूंगी"
प्रतिभा शुक्ला ने 'आजतक' से बातचीत में कहा कि स्थानीय सांसद जातिवादी व्यवहार कर रहे हैं और ब्राह्मण अधिकारियों को अपमानित करते हैं। DM काम नहीं कर रहे, सिर्फ पैसे की सुनते हैं। अगर शाम तक कार्यकर्ता को प्रताड़ित करने वाले इंस्पेक्टर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो फिर से धरना होगा।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और ब्राह्मण कार्ड
उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरणों का हमेशा से राजनीतिक महत्व रहा है। ऐसे में एक ब्राह्मण नेता द्वारा डिप्टी सीएम जैसे वरिष्ठ ब्राह्मण चेहरा पर सवाल उठाना पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

सियासी पंडित मान रहे हैं कि ये घटनाक्रम भाजपा के अंदर ब्राह्मण समाज में उपेक्षा की भावना को उभार सकता है, खासकर तब जब लोकसभा चुनाव का माहौल बनने लगा है।

क्या कहता है यह सियासी संकेत?
पार्टी के अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सतह पर आ रहे हैं। जातीय राजनीति की गूंज यूपी बीजेपी को असहज कर सकती है। यदि यह टकराव बढ़ता है, तो इसका असर स्थानीय संगठनों और आगामी चुनावों पर जरूर दिख सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि यूपी बीजेपी के भीतर कई परतों वाले अंतर्विरोध हैं—जाति, नेतृत्व, क्षेत्रीय नियंत्रण और संगठनात्मक संवाद की कमी। अगर समय रहते इन मुद्दों को नहीं सुलझाया गया, तो यह पार्टी के लिए गंभीर परिणाम ला सकते हैं।