Viksit Bharat GRAM JI Bill Passed: मनरेगा की जगह नई ‘जी राम जी’ योजना, संसद से लेकर सड़क तक सियासी घमासान

विकसित भारत ग्राम जी विधेयक लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पारित हो गया है। जानिए मनरेगा की जगह लाई जा रही जी राम जी योजना क्या है, सरकार के तर्क, विपक्ष का विरोध और संसद से लेकर सड़क तक मचे सियासी घमासान की पूरी जानकारी।

Viksit Bharat GRAM JI Bill Passed: मनरेगा की जगह नई ‘जी राम जी’ योजना, संसद से लेकर सड़क तक सियासी घमासान

विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी जी राम जी विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है। लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी विपक्ष के तीखे विरोध के बावजूद इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। सरकार का दावा है कि यह विधेयक ग्रामीण भारत में रोजगार के अवसर बढ़ाने और आजीविका को स्थायी आधार देने की दिशा में बड़ा कदम है। बिल के पारित होते ही राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्ष का कड़ा विरोध और वॉकआउट
सरकार के अनुसार यह विधेयक करीब 20 साल पुरानी MGNREGA (मनरेगा) योजना का स्थान लेगा। नई योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी दी जाएगी। केंद्र का तर्क है कि लंबे समय से चली आ रही योजना में कई संरचनात्मक कमियां थीं, जिन्हें दूर करना जरूरी हो गया था।

सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग
राज्यसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने जमकर विरोध दर्ज कराया। महात्मा गांधी का नाम हटाने और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले जाने को लेकर कई दलों ने आपत्ति जताई। विरोध जताते हुए विपक्ष के कई सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद विपक्षी दलों ने संसद परिसर में संविधान सदन के बाहर धरना भी दिया और विधेयक को वापस लेने की मांग की।

खरगे का तीखा हमला
विपक्ष ने सरकार से आग्रह किया कि इस विधेयक को आगे की जांच के लिए संसदीय सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए। बीजेडी, वाईएसआरसीपी समेत कुछ दलों ने भी बिल में खामियों की बात कहते हुए विस्तृत समीक्षा की जरूरत बताई। हालांकि सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

गांधी और राम के नाम पर सियासत का आरोप
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह तीन कृषि कानूनों को आंदोलन के बाद वापस लेना पड़ा, उसी तरह एक दिन सरकार को यह कानून भी वापस लेना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह विधेयक सड़क से लेकर सदन तक विरोध का कारण बनेगा और जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।

समर्थन के साथ संशोधन की सलाह
आप सांसद संजय सिंह ने सरकार पर गांधी और राम के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में गांधी की प्रतिमाएं हैं और गांधी रामभक्त थे, ऐसे में राम के नाम पर योजनाओं को लेकर राजनीति करना अनुचित है। उनका कहना था कि नाम बदलने से गरीब मजदूरों का भला नहीं होगा।

अन्नाद्रमुक सांसद एम थंबीदुरई ने बिल का समर्थन करते हुए 60-40 के वित्तीय प्रावधान पर पुनर्विचार की मांग की। उन्होंने कहा कि नाम को लेकर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। वहीं बीजेडी और अन्य दलों ने नाम बदलने के बजाय मजदूरों के वास्तविक लाभ पर जोर दिया।

शिवराज सिंह चौहान का जोरदार जवाब
लोकसभा और राज्यसभा दोनों में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक मनरेगा की कमियों को दूर करने के लिए लाया गया है और इसका उद्देश्य केवल मजदूरी नहीं बल्कि स्थायी आजीविका का निर्माण है। उन्होंने विपक्ष पर महात्मा गांधी के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

शिवराज सिंह चौहान ने आरएसएस को चर्चा में घसीटे जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संघ व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र सेवा की परंपरा का केंद्र रहा है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने कभी भी गांधी जी के आदर्शों को ईमानदारी से नहीं अपनाया और सत्ता की लालसा में उनके विचारों को दरकिनार किया।

नाम नहीं, काम पर फोकस का दावा
नाम बदलने के विवाद पर शिवराज ने कहा कि मोदी सरकार का फोकस नामकरण पर नहीं बल्कि परिणाम पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दशकों तक योजनाओं और संस्थानों के नाम एक ही परिवार के नाम पर रखे। सरकार का दावा है कि नई योजना से ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण होगा और गांव आत्मनिर्भर बनेंगे।

आजीविका और परिसंपत्तियों पर जोर
सरकार के मुताबिक जी राम जी योजना के तहत जल संरक्षण, सिंचाई, ग्रामीण सड़कें, पंचायत भवन, स्कूल, आंगनबाड़ी, सोलर लाइट, आवास और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्य किए जाएंगे। लखपति दीदी जैसे अभियानों के जरिए महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का भी लक्ष्य रखा गया है।

विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम
विधेयक पारित होने के बाद सरकार ने इसे विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि विकसित गांव के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है। सरकार का दावा है कि यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा, जबकि विपक्ष इसे मजदूर विरोधी बताकर आगे भी संघर्ष जारी रखने की बात कह रहा है।