बिहार के पूर्व मंत्री हत्याकांड में पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला को नहीं मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी उम्रकैद की सजा

बिहार के पूर्व मंत्री हत्याकांड में पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला को नहीं मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी उम्रकैद की सजा
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने 1998 में पटना में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या के जुर्म में पूर्व विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ ​मुन्ना शुक्ला को दी गई आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। पूर्व प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार तथा न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने मुन्ना शुक्ला और एक सह-दोषी मंटू तिवारी की शीर्ष अदालत के फैसले की समीक्षा संबंधी वाली याचिका खारिज कर दी।

इसके अलावा शीर्ष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी करने के पटना उच्च न्यायालय के फैसले को भी खारिज कर दिया। इसमें दोषी पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला और मंटू तिवारी को आजीवन कारावास की सजा भुगतने के लिए 15 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया था।

दोनों पर धारा 302 (हत्या) के साथ धारा 34 (सामान्य इरादा) के तहत 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया और धारा 307 (हत्या का प्रयास) के साथ धारा 34 के तहत 20,000 रुपये के जुर्माने के साथ पांच साल की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह सहित पांच अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी करने के पटना हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।