पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कटौती का सरकार के राजस्व पर नहीं दिखेगा असर, जानें क्या है इसकी वजह
पेट्रोल-डीजल पर पहले केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क और फिर 22 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा वैट दरों में की गई कटौती का इनके खजानों पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ने वाला है। इसकी वजह यह है कि कोरोना महामारी के बाद इकोनामी की रफ्तार जिस तरह से बनी है, उससे राजस्व संग्रह की वास्तविक स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है। इस कटौती के बावजूद पूरे साल के लिए पेट्रोलियम उत्पादों से होने वाले कुल राजस्व का अनुमान भी केंद्र की उम्मीदों के आसपास रहने वाला है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि पहली नवंबर को जीएसटी संग्रह का आंकड़ा आने के बाद ही यह सहमति बन गई थी कि अब पेट्रोलियम उत्पादों पर शुल्क कटौती कर आम जनता को राहत देने का समय आ गया है। अक्टूबर में जीएसटी संग्रह की राशि 1.30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की थी जो पिछले वर्ष अक्टूबर के मुकाबले 24 प्रतिशत ज्यादा और वर्ष 2019 के समान महीने के मुकाबले 36 प्रतिशत ज्यादा थी।







