अमित शाह का बड़ा खुलासा: रिटायरमेंट के बाद वेद, उपनिषद और प्राकृतिक खेती को समर्पित करेंगे जीवन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘सहकार संवाद’ में रिटायरमेंट के बाद की अपनी योजना बताई। वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती को समर्पित करेंगे जीवन। साथ ही बताया कि सहकारिता गृह मंत्रालय से भी बड़ा काम क्यों है।

अमित शाह का बड़ा खुलासा: रिटायरमेंट के बाद वेद, उपनिषद और प्राकृतिक खेती को समर्पित करेंगे जीवन
Amit shah

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने अपनी भविष्य की योजनाओं से पर्दा उठाते हुए कहा कि वे राजनीति से रिटायरमेंट के बाद Vedas, Upanishads और Prakritik Kheti (प्राकृतिक खेती) के अध्ययन और प्रसार को समर्पित करेंगे। उन्होंने कहा- प्राकृतिक खेती एक वैज्ञानिक प्रयोग है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद फायदेमंद है।

सहकारिता मंत्रालय: किसानों और गांवों के लिए बड़ा काम
अमित शाह ने बताया कि जब उन्हें गृह मंत्रालय सौंपा गया था तो लोग उन्हें बधाई देते हुए कहते थे कि देश का सबसे अहम मंत्रालय उनके पास आ गया। लेकिन उनके मुताबिक- जिस दिन मुझे सहकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई, उस दिन मुझे लगा कि गृह मंत्रालय से भी बड़ा विभाग मुझे मिला है, क्योंकि यह सीधे किसानों, गरीबों, गांवों और पशुधन के उत्थान से जुड़ा हुआ है।

त्रिभुवन काका: जिनका सपना साकार कर रहे हैं अमित शाह
अमित शाह ने गुजरात की सहकारिता क्रांति के जनक त्रिभुवन भाई पटेल उर्फ त्रिभुवन काका का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कभी अपनी प्रसिद्धि के लिए काम नहीं किया, लेकिन उनकी निस्वार्थ सोच की वजह से आज गुजरात की महिलाएं ₹80,000 करोड़ का कारोबार कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि संसद में विरोध के बावजूद त्रिभुवन काका के नाम पर यूनिवर्सिटी बनवाई गई। शाह ने कहा, गुजरात की लाखों महिलाएं आज भी त्रिभुवन काका को आशीर्वाद देती हैं।

बनासकांठा का बदलाव: एक करोड़ सालाना कमाने वाले किसान
अमित शाह ने याद किया कि जब वे छोटे थे, तब गुजरात के बनासकांठा और कच्छ में पानी के लिए लोग तरसते थे। हफ्ते में एक बार नहाने को पानी मिलता था। आज वही इलाके सहकारिता के बल पर इतना समृद्ध हो गए हैं कि एक-एक परिवार सालाना ₹1 करोड़ तक दूध और डेयरी से कमा रहा है।