ठाकरे बंधुओं को चुनावी करारा झटका: BEST क्रेडिट सोसायटी में एक भी सीट नहीं, BJP ने साधा निशाना
BEST क्रेडिट सोसायटी चुनाव 2025 में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को करारी हार का सामना करना पड़ा। 21 सीटों पर उतरे दोनों का पैनल एक भी सीट नहीं जीत सका। जानें BJP, शिंदे गुट और विपक्ष की प्रतिक्रिया और BMC चुनाव पर इसका असर।
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, जो करीब दो दशक बाद एकसाथ आए थे, उन्हें बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) क्रेडिट सोसायटी चुनाव में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है।
शिवसेना (UBT)-MNS गठबंधन के उत्कर्ष पैनल ने कुल 21 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सका। यह हार दोनों नेताओं के लिए राजनीतिक शर्मिंदगी से कम नहीं है क्योंकि यह उनका दोस्ती के बाद पहला चुनाव था।
15 हजार सदस्य, 9 साल बाद चुनाव, फिर भी हार
BEST क्रेडिट सोसायटी में करीब 15,000 सदस्य हैं और 9 साल बाद यह चुनाव हुआ। अब तक इस सोसायटी पर शिवसेना (UBT) का दबदबा रहा था, लेकिन इस बार हार ने समीकरण बदल दिए। यह नतीजा ठाकरे बंधुओं के लिए इसलिए भी बड़ा झटका है क्योंकि सोसायटी में ज्यादातर सदस्य मराठी भाषी हैं और ठाकरे बंधु हमेशा मराठियों के हक की राजनीति का दावा करते रहे हैं।
BJP और शिंदे गुट की खुशी
चुनावी नतीजों के बाद CM देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ठाकरे परिवार ने ही इस चुनाव को राजनीतिक बना दिया था। जनता ने ठाकरे ब्रांड को नकार दिया है।
वहीं, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने तंज कसा, EVM पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब मिला है। महाराष्ट्र की जनता तय कर चुकी है कि जो काम करता है उसे काम करने का मौका दिया जाए।
विपक्ष के आरोप: 'पैसे बांटे गए, धनबल का इस्तेमाल'
MNS नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि इस नतीजे को लिटमस टेस्ट नहीं माना जाना चाहिए। वहीं, शिवसेना (UBT) के सुहास सामंत ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी धनबल के सामने टिक नहीं सकी।
कर्मचारियों की नाराजगी ने डुबोया पैनल
विजेता यूनियन नेता शशांक राव ने दावा किया कि यह नतीजा कर्मचारियों की नाराजगी का नतीजा है। सालों से भर्ती लंबित पड़ी थी। कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिला। कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 3 साल से ग्रेच्युटी नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि शिवसेना (UBT) की निजीकरण नीति और कर्मचारियों की अनदेखी के खिलाफ यह जवाब मिला है।
ठाकरे बंधुओं की रणनीति पर उठे सवाल
यह हार ठाकरे भाइयों की नई दोस्ती पर भी सवाल खड़े करती है। जानकारों का मानना है कि उन्हें इस चुनाव को इतना हाई-प्रोफाइल नहीं बनाना चाहिए था। सहकारी समिति के चुनाव को राजनीतिक बैरोमीटर बनाना उनकी बड़ी भूल रही। अब यह स्पष्ट हो गया है कि BJP-NDA इस नतीजे का फायदा उठाकर ठाकरे ब्रांड को कमजोर करने की कोशिश करेगी।
BMC चुनाव से पहले करारा झटका
यह चुनाव परिणाम सीधे तौर पर BMC Election 2025 से जोड़े जा रहे हैं। मराठी मतदाताओं पर ठाकरे भाइयों का असर घटा है। BEST चुनाव को BMC का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
हालांकि जानकार मानते हैं कि निकाय चुनावों में समीकरण अलग होते हैं। BEST का चुनाव कर्मचारियों और संगठन तक सीमित है, जबकि BMC चुनाव में मुद्दे व्यापक होंगे।


आँखें न्यूज़ 24 




