बिहार चुनाव 2025: क्या 20 सीटों की जिद से एनडीए छोड़ देंगे जीतन राम मांझी?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जीतन राम मांझी की 20 सीटों की मांग ने एनडीए गठबंधन के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। HAM की रणनीति, जातीय प्रभाव और पिछली जीत के आधार पर इस बार मांझी राज्यस्तरीय पार्टी की मान्यता पाना चाहते हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एनडीए गठबंधन में खींचतान बढ़ती जा रही है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) से लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) तक हर दल अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाने के लिए प्रेशर पॉलिटिक्स का सहारा ले रहा है। इस बीच जीतन राम मांझी ने 20 सीटों की मांग कर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
जीतन राम मांझी की महत्वाकांक्षा
HAM प्रमुख जीतन राम मांझी चाहते हैं कि उनकी पार्टी को राज्यस्तरीय पार्टी का दर्जा मिले। हालांकि, राजनीति में हसरत से ज्यादा मायने जनता में प्रभाव और वोट शेयर का होता है। 2020 में मांझी की पार्टी को केवल 4 सीटें मिली थीं, जबकि उनका वोट शेयर 0.9% था। इस बार मांझी मगध के बाहर भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं और ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं।
सीट बंटवारे पर चुनौती
HAM की बढ़ती मांगें एनडीए गठबंधन के लिए सिरदर्द बन रही हैं। इससे पहले चिराग पासवान और उपेन्द्र कुशवाहा भी सीटों को लेकर समझौते के मूड में नहीं थे। इस बार मांझी चाहते हैं कि उनकी पार्टी को कम से कम 20 सीटें दी जाएं, जबकि सूत्रों के मुताबिक उन्हें संभवतः 7-8 सीटें ही मिलेंगी।
जातीय और क्षेत्रीय प्रभाव
जीतन राम मांझी मुशहर जाति से आते हैं, जो अनुसूचित जातियों में पिछड़ी जातियों में शामिल है। इस जाति की संख्या बिहार में लगभग 40 लाख है। मगध क्षेत्र में यह समुदाय अधिक है और वहीं मांझी का सबसे बड़ा प्रभाव भी है। इस कारण से उनकी पार्टी विशेषकर गया और मगध इलाके में अधिक सीटों की मांग कर रही है।
पिछली जीत और आगामी रणनीति
पिछली विधानसभा में HAM ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 सीटें जीतें, जबकि एक सीट पर जमानत जब्त हो गई। मांझी की राज्यस्तरीय मान्यता हासिल करने की रणनीति इस बार यही है कि 7 से 8 सीटों पर जीत दर्ज कर वोट शेयर बढ़ाया जाए। गठबंधन में रहते हुए 6% वोट का आंकड़ा हासिल करना मुश्किल है, इसलिए पार्टी 10 से ज्यादा सीटों की मांग कर रही है, जिससे एनडीए का गणित चुनौतीपूर्ण बन गया है।


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