तेजस्वी यादव का मास्टरस्ट्रोक: तेज प्रताप की ‘साली’ करिश्मा राय को मैदान में उतारकर आरजेडी ने चला बड़ा चुनावी दांव

तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप की साली करिश्मा राय को परसा सीट से उम्मीदवार बनाकर बड़ा सियासी दांव चला है। जानिए इसके पीछे की रणनीति।

तेजस्वी यादव का मास्टरस्ट्रोक: तेज प्रताप की ‘साली’ करिश्मा राय को मैदान में उतारकर आरजेडी ने चला बड़ा चुनावी दांव

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सियासी जंग अपने चरम पर है। हर दल अपने समीकरण दुरुस्त करने में जुटा है। इसी बीच आरजेडी (RJD) के नेता और लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे राज्य की राजनीति को हिला दिया है।

तेजस्वी ने तेज प्रताप यादव की साली करिश्मा राय को परसा विधानसभा सीट से पार्टी उम्मीदवार बनाया है। यह फैसला केवल उम्मीदवार चयन नहीं बल्कि एक सियासी संदेश भी है — कि लालू परिवार अब पुराने रिश्तों और विवादों से ऊपर उठकर चुनावी मैदान में रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ रहा है।

लालू परिवार का नया समीकरण
तेज प्रताप यादव और उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय के बीच चल रहे विवाद ने सालों से लालू परिवार को चर्चा में रखा। ऐश्वर्या के पिता चंद्रिका राय, जो दरोगा प्रसाद राय के बेटे हैं, कभी आरजेडी के वरिष्ठ नेता हुआ करते थे। लेकिन पारिवारिक विवाद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ जेडीयू का दामन थाम लिया।

अब तेजस्वी यादव ने करिश्मा राय — यानी चंद्रिका राय के बड़े भाई विधानचंद्र राय की बेटी — को टिकट देकर एक ही चाल में कई सियासी निशाने साध लिए हैं।

करिश्मा राय — दरोगा प्रसाद राय की विरासत का नया चेहरा
करिश्मा राय राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनके दादा दरोगा प्रसाद राय बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और परसा विधानसभा सीट पर दशकों तक उनका दबदबा रहा।

1952 में पहली बार विधायक बने दरोगा राय ने 1970 में बिहार की कमान संभाली। इस सीट पर उनके बेटे चंद्रिका राय कई बार विधायक रहे — कभी जेडीयू से, कभी आरजेडी से। परसा को उन्होंने अपनी कर्मभूमि बना दिया था।

अब करिश्मा राय का चुनाव मैदान में उतरना इस विरासत को आगे बढ़ाने जैसा माना जा रहा है।

तेजस्वी बनाम तेज प्रताप — सियासत में रिश्तों की दरार
तेज प्रताप यादव अब खुद की पार्टी बनाकर महुआ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने अपने पिता और भाई से राजनीतिक दूरी बना ली है।

ऐसे में तेजस्वी यादव द्वारा अपनी ही साली को टिकट देना एक पॉलिटिकल स्टेटमेंट है — कि पार्टी अब निजी रिश्तों से ऊपर उठकर संगठन और वोट बैंक की मजबूती पर ध्यान दे रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम डैमेज कंट्रोल की दिशा में है। तेज प्रताप के कारण जो यादव समुदाय का एक वर्ग नाराज था, उसे मनाने की कोशिश तेजस्वी ने करिश्मा राय के टिकट से की है।

यादव वोट बैंक की मजबूती का समीकरण
बिहार की राजनीति में यादव वोट बैंक सबसे बड़ा ओबीसी ब्लॉक है — लगभग 15% मतदाता। आरजेडी की पहचान यादव-मुस्लिम समीकरण पर टिकी है।

पिछले कुछ वर्षों में तेज प्रताप यादव के विवादित बयानों और ऐश्वर्या राय केस को लेकर यादव समाज में नाराजगी थी। अब तेजस्वी ने करिश्मा राय को उतारकर संदेश दिया है कि आरजेडी पारिवारिक विवादों से ऊपर उठकर यादव एकता को प्राथमिकता देगी।

परसा सीट पर दिलचस्प मुकाबला
2025 में परसा सीट से मुकाबला बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। आरजेडी से करिश्मा राय मैदान में हैं। जेडीयू से छोटे लाल राय, जो पहले आरजेडी से विधायक रह चुके हैं, चुनाव लड़ रहे हैं।

चंद्रिका राय के जेडीयू में किनारे हो जाने के बाद यह मुकाबला और रोचक हो गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि चंद्रिका राय अपनी भतीजी के समर्थन में आते हैं या पार्टी लाइन पर चलते हैं।

तेजस्वी की रणनीति — एक तीर से कई निशाने
तेजस्वी यादव ने इस कदम से तीन बड़े फायदे साधे हैं —
यादव वोट बैंक को एकजुट करना।
दरोगा राय परिवार की विरासत से जुड़कर परसा की परंपरागत सीट पर पकड़ बनाना।
तेज प्रताप को सियासी तौर पर आइसोलेट करना।

तेजस्वी ने यह साफ संकेत दिया है कि पार्टी में अब व्यक्तिगत विवादों के लिए जगह नहीं, बल्कि जनाधार ही प्राथमिकता होगी।

राजनीतिक संदेश साफ: 'परिवार से ऊपर पार्टी'
तेजस्वी यादव का यह फैसला बताता है कि वे अब ‘इमोशनल पॉलिटिक्स’ की जगह ‘प्रैक्टिकल पॉलिटिक्स’ पर भरोसा कर रहे हैं। करिश्मा राय का चयन न केवल परसा सीट के समीकरण बदल सकता है, बल्कि आरजेडी की अंदरूनी राजनीति में भी नई परिभाषा गढ़ सकता है।