हॉर्मुज में भारत की कूटनीतिक जीत! तनाव के बीच भारतीय टैंकरों को मिला सुरक्षित रास्ता

भारत और ईरान की उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के बाद भारतीय झंडे वाले टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिल गई। क्षेत्रीय तनाव के बीच इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।

हॉर्मुज में भारत की कूटनीतिक जीत! तनाव के बीच भारतीय टैंकरों को मिला सुरक्षित रास्ता

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता का असर साफ दिखाई दिया है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद ईरान ने भारत के झंडे वाले तेल टैंकरों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। ऐसे समय में यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है, जब इस क्षेत्र में कई देशों के जहाजों को हमलों और प्रतिबंधों के खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

भारतीय टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही बना बड़ा संकेत
कूटनीतिक बातचीत के तुरंत बाद इसका असर भी दिखाई दिया। भारत के झंडे वाले दो टैंकर ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से सुरक्षित गुजरते हुए देखा गया। मौजूदा हालात में इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में जारी तनाव के कारण कई विदेशी जहाजों की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और समुद्री रास्तों पर खतरा लगातार बढ़ रहा है।

बढ़ते हमलों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव
दरअसल हाल के दिनों में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर भी चिंता गहराई है। यह इलाका दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए यहां होने वाली हर हलचल का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।

हॉर्मुज को रणनीतिक हथियार की तरह देख रहा ईरान
ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के हित से जुड़े तेल को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं देगा। ईरान के इस बयान से साफ है कि वह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को एक रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण का मतलब है कि ईरान के पास वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता मौजूद है।

संकट के बीच कूटनीति ने दिखाया असर
ऐसे तनावपूर्ण माहौल में भारत की कूटनीतिक कोशिशों का असर दिखना एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। युद्ध और नाकेबंदी जैसे हालात के बीच भी भारत ने संवाद का रास्ता अपनाया और उसके परिणामस्वरूप भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल गया। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय संकट की घड़ी में प्रभावी कूटनीति कई बार बड़े टकरावों के बीच भी रास्ता निकाल सकती है।