कर्नाटक में सत्ता का संग्राम: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार – ढाई साल बाद फिर गर्माई कुर्सी की राजनीति

कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद मुख्यमंत्री परिवर्तन की मांग तेज हो गई है। डीके शिवकुमार के समर्थक दिल्ली पहुंचकर हाईकमान पर दबाव बना रहे हैं जबकि सिद्धारमैया ने फैसला कांग्रेस नेतृत्व पर छोड़ दिया है। जानिए कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई और सत्ता संघर्ष का पूरा विश्लेषण।

कर्नाटक में सत्ता का संग्राम: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार – ढाई साल बाद फिर गर्माई कुर्सी की राजनीति
Siddaramaiah vs DK Shivakumar

कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे होते ही सत्ता परिवर्तन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थक विधायक लगातार दिल्ली पहुंच रहे हैं और आलाकमान पर दबाव बनाने की कोशिशें जारी हैं कि अब नेतृत्व की बागडोर उन्हें सौंप दी जाए।

सिद्धारमैया के बदले सुर, फैसला कांग्रेस हाईकमान पर छोड़ने की बात
अब तक खुद को पूर्ण कार्यकाल वाला मुख्यमंत्री बताने वाले सिद्धारमैया ने नए बयान में साफ कहा है कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने या हटने का फैसला सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस हाईकमान करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब शिवकुमार गुट अपना दावा और तेज कर चुका है।

ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले ने बनाया मौजूदा संकट
2023 में सरकार गठन के समय सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने का फार्मूला तय हुआ था। समझौते के अनुसार सिद्धारमैया पहले ढाई साल मुख्यमंत्री रहेंगे और बाकी ढाई साल शिवकुमार के नाम होंगे। सिद्धारमैया का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा हो चुका है, लेकिन पद छोड़ने के संकेत नहीं मिल रहे।

दिल्ली में डेरा डाल रहे विधायक – शिवकुमार गुट की रणनीति तेज
डीके शिवकुमार के करीबी विधायक समूहों में दिल्ली पहुंच चुके हैं। उनका साफ कहना है कि अब समझौते को लागू करने का समय आ गया है। वे पार्टी नेतृत्व से मिलकर शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग रखने जा रहे हैं।

सिद्धारमैया का नया दांव: पहले कैबिनेट फेरबदल फिर निर्णय
सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया ने हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर कैबिनेट फेरबदल का प्रस्ताव रखा है। अगर हाईकमान इसे मान लेता है, तो यह संकेत होगा कि सिद्धारमैया पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे। यह स्थिति शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के रास्ते को कमजोर कर देगी।

शिवकुमार खेमे की मांग: पहले नेतृत्व परिवर्तन, फिर फेरबदल
शिवकुमार समर्थक चाहते हैं कि पहले मुख्यमंत्री बदला जाए और उसके बाद कैबिनेट पर चर्चा हो। उनके अनुसार अब फार्मूले का समय पूरा हो चुका है और सत्ता परिवर्तन को टाला नहीं जाना चाहिए।

जातीय राजनीतिक समीकरण भी बने विवाद का हिस्सा
सिद्धारमैया ओबीसी समुदाय से आते हैं, जिसका वोटो के लिहाज से कर्नाटक में बड़ा असर है। वहीं डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के प्रमुख नेता हैं और पुराने मैसूर क्षेत्र में कांग्रेस की मजबूती के लिए अहम माने जाते हैं। यही सामाजिक समीकरण कांग्रेस नेतृत्व के लिए फैसला लेना मुश्किल बना रहा है।

सिद्धारमैया की महत्वाकांक्षा – तोड़ना चाहते हैं सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड
सिद्धारमैया यदि जनवरी 2026 तक मुख्यमंत्री बने रहते हैं, तो वे कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक सीएम रहने का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। यही वजह है कि वे पांच साल का पूरा कार्यकाल खत्म करने की कोशिश में हैं।

शिवकुमार शांत लेकिन रणनीतिक – पार्टी के खिलाफ नहीं लेना चाहते सख्त स्टैंड
डीके शिवकुमार सार्वजनिक मंचों पर संयमित बयान दे रहे हैं और बार-बार हाईकमान के निर्णय को सर्वोपरि बता रहे हैं। लेकिन उनके समर्थक पूरी तरह सक्रिय हैं और उनके लिए माहौल बनाने में जुटे हुए हैं।

कर्नाटक कांग्रेस की कलह – पार्टी की राष्ट्रीय छवि पर असर
कांग्रेसी सरकार मज़बूत बहुमत के बावजूद अंतर्कलह में घिरी दिख रही है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरह कर्नाटक में भी नेतृत्व विवाद कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।