लद्दाख में सैन्य वाहन पर गिरा विशाल बोल्डर: 2 अधिकारी शहीद, 3 घायल

लद्दाख के गलवान इलाके में सेना के वाहन पर गिरा विशाल बोल्डर, 2 अधिकारी शहीद और 3 घायल। फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने दी जानकारी। जानें हादसे की पूरी डिटेल।

लद्दाख में सैन्य वाहन पर गिरा विशाल बोल्डर: 2 अधिकारी शहीद, 3 घायल
प्रतीकात्मक तस्वीर

लद्दाख की गलवान घाटी एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार कारण सीमा तनाव नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक आपदा के चलते हुआ सैन्य हादसा है। बुधवार, 30 जुलाई 2025 को सुबह करीब 11:30 बजे, लद्दाख के चारबाग क्षेत्र में सेना के एक वाहन पर विशाल बोल्डर गिर गया, जिससे दो सैन्य अधिकारियों की मौके पर ही शहादत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

दुरबुक से चोंगटास की ओर बढ़ रहा था सैन्य काफिला
भारतीय सेना का यह काफिला दुरबुक से चोंगटास के लिए ट्रेनिंग मिशन पर निकला था। रास्ते में भूस्खलन के दौरान एक चट्टान का बड़ा टुकड़ा एक वाहन पर गिर गया। हादसा इतना भीषण था कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

सेना की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ये हादसा फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के अधीन आता है और बचाव अभियान तत्काल शुरू कर दिया गया।

शहीद हुए अधिकारी – देश ने खोए दो वीर सपूत
- लेफ्टिनेंट कर्नल मनकोटिया (14 सिंध हॉर्स)
- दलजीत सिंह (14 सिंध हॉर्स)

इन दोनों अधिकारियों ने कर्तव्य की राह में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। भारतीय सेना ने उनकी शहादत पर गहरा शोक जताया है।

घायल अधिकारी – एयरलिफ्ट कर पहुंचाया गया अस्पताल
- मेजर मयंक शुभम (14 सिंध हॉर्स)
- मेजर अमित दीक्षित (60 आर्म्ड)
- कैप्टन गौरव (60 आर्म्ड)

इन तीनों घायल अधिकारियों को 153 GH (जनरल हॉस्पिटल), लेह में भर्ती कराया गया है। इनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

मई 2025 में भी हुआ था सेना का बड़ा हादसा
यह हादसा हाल के महीनों में दूसरा बड़ा सैन्य वाहन हादसा है। इससे पहले मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के बैटरी चश्मा क्षेत्र में सेना का ट्रक 200-300 मीटर गहरी खाई में गिर गया था। उस हादसे में तीन जवान शहीद हुए थे। यह वाहन नेशनल हाईवे-44 पर श्रीनगर जा रहे सैन्य काफिले का हिस्सा था। हादसे का कारण वाहन का नियंत्रण खोना पाया गया था।

सेना का साहस: विषम परिस्थितियों में भी डटे रहते हैं जवान
भारत की सीमाएं चाहे गर्म रेगिस्तान हों या बर्फीले पहाड़, सेना के जवान हर परिस्थिति में डटे रहते हैं। ये हादसे उनकी निस्वार्थ सेवा और बलिदान की कहानियों को एक बार फिर सामने लाते हैं।