Tariff War में राहत: डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर टैरिफ सस्पेंशन 90 दिनों के लिए बढ़ाया, Beijing ने भी दिया पॉजिटिव रिस्पॉन्स
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर टैरिफ सस्पेंशन को 90 दिनों के लिए बढ़ाने का ऐलान किया। जवाब में चीन ने भी टैरिफ हाइक को पॉज रोक दिया। जानें US-China Trade War 2025 के ताज़ा अपडेट्स।
ट्रेड वॉर से जूझ रही दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं—अमेरिका और चीन—के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। 11 अगस्त 2025 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में घोषणा की कि उन्होंने एक Executive Order पर साइन कर दिया है, जिसके तहत चीन पर लगाए गए टैरिफ सस्पेंशन को 90 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है। इस कदम के बाद, चीन ने भी अपने टैरिफ हाइक को अगले तीन महीनों के लिए रोकने का ऐलान कर दिया।
ट्रंप का स्पष्ट संदेश
ट्रंप ने कहा— मैंने एक Executive Order साइन किया है जो चीन पर Tariff Suspension को 90 दिनों के लिए बढ़ाएगा। बाकी समझौते के बिंदु वही रहेंगे।" यह कदम ऐसे समय में आया है जब पिछली डेडलाइन 12 अगस्त 2025 को सुबह 12:01 बजे खत्म होने वाली थी, जिसके बाद अमेरिका और चीन दोनों अपने-अपने टैरिफ में भारी बढ़ोतरी कर सकते थे।
टैरिफ वॉर कैसे भड़का
इस साल की शुरुआत में अमेरिका और चीन ने एक-दूसरे के प्रोडक्ट्स पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए थे, जो triple-digit levels तक पहुंच गए थे। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार में बड़ी बाधाएं आईं। हालांकि, मई 2025 में दोनों ने अस्थायी रूप से टैरिफ कम करने का फैसला लिया था, जिससे ट्रेड टेंशन में कुछ कमी आई थी।
चीन का रिएक्शन और जॉइंट स्टेटमेंट
ट्रंप के ऐलान के तुरंत बाद चीनी स्टेट मीडिया शिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने जानकारी दी कि स्टॉकहोम में हुई यूएस-चीन वार्ता के बाद दोनों देशों ने एक Joint Statement जारी किया है। इसमें यह तय हुआ कि चीन भी अपने पहले के टैरिफ हाइक को 90 दिनों के लिए सस्पेंड करेगा और 10% ड्यूटी बनाए रखेगा।
शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने Geneva Joint Declaration के तहत अमेरिका के खिलाफ non-tariff countermeasures को सस्पेंड या हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का वादा भी किया है।
ग्लोबल इकोनॉमी पर असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अस्थायी समझौता वैश्विक बाजारों में स्थिरता ला सकता है और स्टॉक मार्केट में पॉजिटिव मूवमेंट देखने को मिल सकता है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि यह सिर्फ एक cooling-off period है, और असली चुनौती तब आएगी जब दोनों पक्ष स्थायी समाधान के लिए बातचीत करेंगे।


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