माघ मेले से धर्म संसद तक: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बनाम योगी, टकराव ने पकड़ी सियासी आग
प्रयागराज माघ मेले से शुरू हुआ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और योगी आदित्यनाथ का विवाद अब धर्म संसद और सियासी टकराव तक पहुंच गया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटनाओं के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति और संत समाज में हलचल तेज हो गई है। कई दिनों तक अनशन पर रहने के बाद शंकराचार्य बिना संगम स्नान किए ही माघ मेले से लौट आए। इसके साथ ही उन्होंने काशी से आगे की रणनीति का ऐलान कर दिया, जिससे यह विवाद थमने के बजाय और गहराता दिख रहा है।
काशी पहुंचकर शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि वह इस पूरे घटनाक्रम को केवल प्रशासनिक मामला नहीं मानते। उनका कहना है कि यह सनातन पर चोट है और इसी वजह से अब संत समाज को एकजुट करने की जरूरत है। उन्होंने महाशिवरात्रि से पहले 10 और 11 मार्च को लखनऊ में संत समागम और धर्म संसद बुलाने की घोषणा की है।
‘नकली हिंदू’ पर शंकराचार्य का हमला
शंकराचार्य का कहना है कि लखनऊ में संत-महंत और आचार्य यह तय करेंगे कि वास्तव में हिंदू कौन है और कौन केवल दिखावे का हिंदू बनकर जनता को भ्रमित कर रहा है। उन्होंने ‘नकली हिंदू’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि देश के हिंदुओं के साथ बड़ा छल हो रहा है और इसका पर्दाफाश जरूरी है।
मीडिया से बातचीत में तीखे आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि खुद को योगी, संत और भगवाधारी बताने वाले लोग और उनकी पार्टी ही इस छल के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ सनातन धर्म और संत समाज का समर्थन है और अब आर-पार की लड़ाई होगी।
योगी सरकार को 40 दिन की चुनौती
इसी क्रम में शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का अल्टीमेटम देकर सियासी तापमान और बढ़ा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश से दुनियाभर में गोमांस की सप्लाई हो रही है और योगी सरकार इसे रोककर दिखाए। उनका कहना है कि अगर 40 दिन में यह साबित नहीं हुआ, तो लखनऊ पहुंचकर संतों के साथ खुली निंदा की जाएगी।
‘प्रमाण’ की मांग से बढ़ा विवाद
शंकराचार्य ने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ को अपने हिंदू होने और गो-भक्त होने का प्रमाण देना चाहिए। उनके अनुसार, जब उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया था और उन्होंने दिया, तो अब मुख्यमंत्री को भी प्रमाण देने में संकोच नहीं करना चाहिए।
प्रशासन पर लालच देने के आरोप
प्रयागराज से लौटने के बाद काशी में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संगम स्नान के लिए उन्हें विशेष सम्मान और फूल बरसाने जैसे प्रस्ताव दिए गए, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। उनका तर्क था कि पहले उन संन्यासियों से माफी मांगी जाए, जिन पर लाठीचार्ज हुआ था।
संत समाज में मतभेद
इस पूरे विवाद पर संत समाज भी एक राय में नहीं है। स्वामी नारायणाचार्य और अनंत श्याम देवाचार्य जैसे संतों ने शंकराचार्य के बयानों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि योगी आदित्यनाथ को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ कहा जाता रहा है और इस तरह सवाल उठाना उचित नहीं है।
सियासत में भी तेज बयानबाज़ी
राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया तेज है। योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या शंकराचार्य सभी हिंदुओं के ठेकेदार हैं। इस बयान के बाद साफ है कि यह मामला केवल धार्मिक नहीं, बल्कि पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है।
अगले माघ मेले का ऐलान, संघर्ष जारी
शंकराचार्य ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि वह अगले साल माघ मेले में मौनी अमावस्या पर संगम स्नान जरूर करेंगे। फिलहाल उनका जोर इस बात पर है कि प्रशासन और सत्ता को अपने आचरण और फैसलों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए।


आँखें न्यूज़ 24 




