अमेरिका में ट्रंप का सख्त कदम: वॉशिंगटन में हथियारबंद नेशनल गार्ड की तैनाती, अन्य शहरों को भी चेतावनी

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हथियारों से लैस नेशनल गार्ड तैनात किए। अपराध और बेघर समस्या से निपटने के लिए उठाए इस कदम के बाद अब शिकागो, बाल्टीमोर और न्यूयॉर्क में भी ऐसी तैनाती की चेतावनी दी गई है।

अमेरिका में ट्रंप का सख्त कदम: वॉशिंगटन में हथियारबंद नेशनल गार्ड की तैनाती, अन्य शहरों को भी चेतावनी
Donald Trump

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डी.सी. में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नेशनल गार्ड की यूनिट्स को हथियारों के साथ सड़कों पर उतार दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जवान पिस्तौल और राइफल्स से लैस होकर प्रमुख इलाकों में गश्त कर रहे हैं। यह कदम अपराध और बेघरों की समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए उठाया गया है।

रक्षा मंत्री के आदेश के बाद बढ़ी सख्ती
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, बीते हफ्ते रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के आदेश के बाद राजधानी में कई गार्ड यूनिट्स को हथियार दिए गए। पेंटागन सूत्रों ने पुष्टि की है कि जवानों को सख्त नियमों के तहत प्रशिक्षित किया गया है ताकि बल का प्रयोग संयम से हो। रविवार (24 अगस्त 2025) को यूनियन स्टेशन और नेशनल मॉल के पास साउथ कैरोलिना और वेस्ट वर्जीनिया नेशनल गार्ड को हथियारों के साथ देखा गया।

ट्रंप की चेतावनी: "शिकागो-बाल्टीमोर में भी भेज सकता हूं सैनिक"
राष्ट्रपति ट्रंप ने वॉशिंगटन की तरह ही अन्य डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले शहरों में नेशनल गार्ड भेजने की धमकी दी। बाल्टीमोर का जिक्र करते हुए उन्होंने मैरीलैंड के गवर्नर वेस मूर से सीधा टकराव दिखाया। साथ ही शिकागो और न्यूयॉर्क को भी अपने निशाने पर बताया।

हालांकि अपराध के आंकड़े बताते हैं कि वॉशिंगटन में 2024 में हिंसक अपराध 30 साल के निचले स्तर पर थे और 2025 में इसमें और 26% की गिरावट आई है। बावजूद इसके, ट्रंप ने कहा कि “सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना ही सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

सड़कों पर हजारों फेडरल जवान, बढ़ता विरोध
फिलहाल राजधानी की सड़कों पर हजारों नेशनल गार्ड और फेडरल लॉ एनफोर्समेंट अधिकारी तैनात हैं। इससे आम लोग असहज महसूस कर रहे हैं और कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं।

डेमोक्रेटिक नेताओं का कहना है कि यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप की “सत्तावादी सोच” का हिस्सा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा साबित हो सकता है।