महिला सुरक्षा को नई मजबूती: बिहार में वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन 181 के कर्मियों के लिए दो दिवसीय संवेदनशीलता प्रशिक्षण शुरू

बिहार में वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन 181 के कर्मियों के लिए दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मनोवैज्ञानिक समझ, घरेलू हिंसा के चक्र, संकट हस्तक्षेप और तकनीकी प्रशिक्षण पर विस्तृत जानकारी दी गई।

महिला सुरक्षा को नई मजबूती: बिहार में वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन 181 के कर्मियों के लिए दो दिवसीय संवेदनशीलता प्रशिक्षण शुरू

महिला एवं बाल विकास निगम के सभागार में 27-28 नवंबर 2025 को एक महत्त्वपूर्ण दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें राज्य के सभी 38 जिलों के वन स्टॉप सेंटर के केंद्र प्रशासक, महिला हेल्पलाइन 181 के टेली कॉलर और अन्य संबंधित कर्मियों ने हिस्सा लिया। यह प्रशिक्षण खास तौर पर उन टीमों की मनोवैज्ञानिक समझ को मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया है, जो हिंसा से पीड़ित महिलाओं को तुरंत सहायता और परामर्श उपलब्ध कराती हैं।

बिहार सरकार का संकल्प—हर पीड़िता को एक ही छत के नीचे संपूर्ण सहायता
निगम की नोडल पदाधिकारी मार्गन सिन्हा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि बिहार सरकार महिलाओं के प्रति होने वाली किसी भी तरह की हिंसा को खत्म करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा, मानव तस्करी या अन्य प्रकार की हिंसा से पीड़ित महिलाओं और किशोरियों को एक ही स्थान पर मेडिकल सहायता, कानूनी सहयोग, पुलिस सपोर्ट और परामर्श उपलब्ध कराने के लिए वन स्टॉप सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।

संवेदनशील और समयबद्ध हस्तक्षेप की जरूरत पर जोर
उन्होंने जोर देकर कहा कि वन स्टॉप सेंटर जिला पदाधिकारी के नियंत्रण में संचालित होते हैं, इसलिए जिम्मेदारी और संवेदनशीलता दोनों ही बहुत महत्त्वपूर्ण हो जाती हैं। पीड़िताओं की तत्काल सहायता के लिए समयबद्ध और मानवीय दृष्टिकोण आवश्यक है।

परामर्श के मूल सिद्धांत—गोपनीयता, सम्मान और सहानुभूति सबसे ऊपर
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस (NIMHANS) के सहायक प्राध्यापक सुन्दररंग गंजेकर ने परामर्श के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़िता को परामर्श देते समय उसकी गोपनीयता, सम्मान, सहानुभूति, स्वायत्ता और भावनात्मक स्थिति को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने संकट हस्तक्षेप को समझाते हुए बताया कि यह वह प्रक्रिया है जो किसी भावनात्मक या मानसिक आघात से गुजर रही पीड़िता को अल्पकालिक लेकिन तत्काल मनोवैज्ञानिक सहारा देती है।

घरेलू हिंसा के चक्र और तात्कालिक मनोवैज्ञानिक उपचार पर विस्तृत चर्चा
इसके बाद NIMHANS की रिसर्च स्कॉलर मार्गी साह ने घरेलू हिंसा पर केंद्रित विस्तृत सत्र लिया। उन्होंने केस स्टडी के माध्यम से घरेलू हिंसा के तीन प्रमुख चरण—तनाव का बढ़ना, हिंसा का विस्फोट और फिर माफी वाला दौर—समझाया। उन्होंने कहा कि पीड़िताओं को मनोवैज्ञानिक ‘इमीजिएट केयर’ देते समय परामर्शदाता को नॉन-जजमेंटल होना चाहिए। सुरक्षा, शांति, जुड़ाव और आशा जैसे सिद्धांतों के सहारे ही पीड़िता को भावनात्मक रूप से संभाला जा सकता है।

चैलेंजिंग कॉल संभालने और परामर्शदाताओं की सेल्फ केयर पर जोर
सावित्रीबाई फुले नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ विमेन एंड चाइल्ड की सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रेरणा पाण्डेय ने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि महिला हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटर पर आने वाले ‘चैलेंजिंग कॉल’ का कैसे सामना किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि परामर्शदाताओं पर लगातार तनावपूर्ण कॉल का मानसिक प्रभाव पड़ता है, इसलिए उनके लिए स्व-देखभाल (Self Care) बेहद जरूरी है।

तकनीकी प्रशिक्षण के साथ कार्यक्रम का सफल समापन
C-DAC त्रिवेंद्रम के प्रशिक्षक डेनिश रोड्रैक ने केंद्र प्रशासकों और टेली कॉलरों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया, जिससे वे शिकायत निस्तारण और डेटा प्रबंधन को अधिक प्रभावी तरीके से कर सकें। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।