Chandra Grahan 2026: इन लोगों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, जानिए कहीं आप भी तो नहीं?

3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा पर लगने वाला साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। जानिए किन जन्मतिथियों और मूलांक वालों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है और ग्रहण काल में क्या सावधानियां रखनी चाहिए।

Chandra Grahan 2026: इन लोगों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, जानिए कहीं आप भी तो नहीं?

3 मार्च को फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दौरान चंद्रमा सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। बताया जा रहा है कि यह खगोलीय घटना भारत में भी दिखाई देगी, इसलिए यहां सूतक काल को मान्य माना जाएगा।

ज्योतिष के अनुसार चंद्र ग्रहण का प्रभाव मानव जीवन पर अलग-अलग रूप में पड़ता है। कुछ लोगों के लिए यह समय नई संभावनाएं और सकारात्मक बदलाव ला सकता है, जबकि कुछ के जीवन में तनाव और उलझनें बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। खासतौर पर जन्मतिथि के आधार पर मूलांक देखने वाले ज्योतिषी कुछ तारीखों पर जन्मे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

मूलांक 2 वालों के लिए संयम जरूरी
जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 2 माना जाता है और इस अंक का संबंध चंद्रमा से जोड़ा जाता है। ऐसे में चंद्र ग्रहण के दौरान इन लोगों को मानसिक और शारीरिक अस्थिरता महसूस हो सकती है। सेहत में गिरावट, स्वभाव में चिड़चिड़ापन और करीबी लोगों से अनबन की स्थिति बन सकती है। कुछ मामलों में गलतफहमियां या झूठे आरोप जैसी स्थितियां भी परेशानी का कारण बन सकती हैं।

मूलांक 5 वालों को आर्थिक फैसलों में सावधानी
इसी तरह जिन लोगों का जन्म 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 5 होता है, जिसका संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। ग्रहण काल में इन लोगों के लिए मानसिक दबाव बढ़ सकता है। सामाजिक छवि प्रभावित होने या आर्थिक मामलों में चिंता की स्थिति बन सकती है। इसलिए इस अवधि में सोच-समझकर फैसले लेने और अनावश्यक विवादों से बचने की सलाह दी जा रही है।

ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें
ग्रहण काल को लेकर परंपरागत मान्यताएं कहती हैं कि इस दौरान घर के भीतर रहकर इष्टदेव का स्मरण करना शुभ माना जाता है। मानसिक रूप से मंत्र जाप करना, ग्रहण के समय भोजन से परहेज करना और ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर दान करना पुण्यदायक माना जाता है। साथ ही नुकीली या कांटेदार वस्तुओं का प्रयोग न करने की भी सलाह दी जाती है, ताकि नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके।