इंद्रधनुष, स्वर्ण कलश या कोई नया संकेत: कैसे चुने जाएंगे अगले दलाई लामा?

14वें दलाई लामा के 90वें जन्मदिन पर उनके उत्तराधिकारी की घोषणा और तिब्बती धार्मिक परंपराओं की गहराई से जानकारी। जानें कि यह निर्णय तिब्बत, चीन और दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है।

इंद्रधनुष, स्वर्ण कलश या कोई नया संकेत: कैसे चुने जाएंगे अगले दलाई लामा?
dalai lama

दलाई लामा तिब्बती बौद्धों के आध्यात्मिक प्रमुख हैं, जिन्हें तिब्बत के लोग 14वें दलाई लामा के अवतार के रूप में मानते हैं। उनका असली नाम तेनजिन ग्यात्सो है। 6 जुलाई को वे 90 वर्ष के हो जाएंगे, जो उनके जीवन और तिब्बती इतिहास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

दलाई लामा का पुनर्जन्म और परंपरागत चयन प्रक्रिया
तिब्बती मान्यता के अनुसार, दलाई लामा की आत्मा का पुनर्जन्म होता है। 1937 में, वर्तमान दलाई लामा को मात्र 2 वर्ष की आयु में उनके पुनर्जन्म के प्रमाणों के आधार पर चुना गया। खोज दल ने उन्हें 13वें दलाई लामा के सामान को पहचानते हुए देखा और यह निर्णय लिया कि वे 14वें दलाई लामा हैं।

दलाई लामा की नई किताब और उत्तराधिकारी की खोज
मार्च 2025 में प्रकाशित उनकी किताब 'वॉयस फॉर द वॉइसलेस' में उन्होंने संकेत दिया कि उनका उत्तराधिकारी चीन के बाहर जन्म लेगा। उन्होंने कहा कि उनकी आत्मा किसी लड़की, किसी कीट, या एक वयस्क व्यक्ति में पुनर्जन्म ले सकती है। साथ ही, उन्होंने तिब्बती धार्मिक परंपराओं के अनुसार उत्तराधिकारी खोजने का आह्वान किया है।

उत्तराधिकारी की पहचान: ऐतिहासिक और धार्मिक प्रक्रिया
1. पूर्व दलाई लामा के सामान की पहचान: मौजूदा दलाई लामा ने 2 वर्ष की उम्र में 13वें दलाई लामा के सामान की पहचान की थी।
2. चुनाव विधियां: कई बार दलाई लामा का नाम चुनने के लिए धार्मिक विधियां अपनाई गईं, जैसे कि नामों को आटे की लोई में छिपाना या स्वर्ण कलश से नाम निकालना।
3. पुनर्जन्म के चिह्न: आठवें दलाई लामा के जन्म के समय इंद्रधनुष और अन्य चमत्कारी घटनाओं का उल्लेख मिलता है।

चीन और दलाई लामा का उत्तराधिकारी विवाद
चीन का दावा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को चुनने का अधिकार उसके पास है और यह प्रक्रिया उसके कानूनों के तहत होगी। चीन ने 1793 से चली आ रही परंपरा का हवाला दिया, जिसमें स्वर्ण कलश से दलाई लामा का नाम निकाला गया था।

दलाई लामा ने तिब्बती जनता से अपील की है कि वे किसी भी राजनीतिक उद्देश्य से चुने गए दलाई लामा को स्वीकार न करें।

भारत और तिब्बत के संबंध
1959 में तिब्बत पर चीनी कब्जे के बाद दलाई लामा भारत आए और धर्मशाला में बस गए। धर्मशाला तिब्बती निर्वासित सरकार का केंद्र है। 2015 में स्थापित गैडेन फोडरंग फाउंडेशन, उत्तराधिकारी की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।