Delhi Acid Attack Case: जब पिता ही निकला साजिश का मास्टरमाइंड, बेटी को बनाया ‘फर्जी पीड़िता’
दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा। एसिड अटैक का दावा करने वाली लड़की के पिता अकील खान ने खुद यह साजिश रची थी। उसने अपनी बेटी से टॉयलेट क्लीनर डालवाकर दूसरों को फंसाने के लिए झूठा केस दर्ज कराया। जानें पूरा मामला, पुलिस की जांच और अब किन धाराओं में कार्रवाई हो रही है।
दिल्ली में हाल ही में हुए एसिड अटैक केस (Delhi Acid Attack Case 2025) ने पुलिस और जनता दोनों को हिला दिया था। लेकिन जांच के बाद जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में पीड़िता के पिता अकील खान को गिरफ्तार किया है, जिसने खुद अपनी बेटी पर एसिड अटैक की झूठी कहानी रचकर दूसरों को फंसाने की कोशिश की।
पुलिस की जांच में बड़ा खुलासा — पिता ने खुद रची झूठी साजिश
उत्तर दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके में हुई इस घटना के बाद पुलिस ने जब गहराई से जांच की, तो पता चला कि अकील खान ने अपनी बेटी से ही टॉयलेट क्लीनर (जिसे एसिड बताया गया था) उसके हाथों पर डलवाया था।
फिर इस पूरे मामले को एसिड अटैक का रूप देकर एक झूठी FIR दर्ज कराई, ताकि कुछ लोगों को फंसाया जा सके।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान अकील खान ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है और बताया कि उसने यह साजिश जितेंद्र नामक युवक और उसके दो साथियों को फंसाने के लिए रची थी।
रेप केस में भी गिरफ्तार हुआ था आरोपी पिता
दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपी अकील खान को शाहबाद डेरी थाने की पुलिस ने पहले से ही रेप केस में गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, जितेंद्र की पत्नी ने शिकायत दी थी कि वह अकील खान की फैक्ट्री में काम करती थी, जहां उसके साथ यौन उत्पीड़न हुआ।
जब उसने समझौता करने से इनकार किया, तो अकील खान ने बदले की भावना से अपनी ही बेटी को एसिड अटैक की झूठी कहानी में शामिल कर लिया, ताकि जितेंद्र को फंसाया जा सके।
अब बेटी पर भी गिर सकती है गिरफ्तारी की गाज
पुलिस अब अकील खान और उसकी बेटी दोनों के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर रही है। दोनों पर झूठा षड्यंत्र रचने (Criminal Conspiracy) और फर्जी केस में निर्दोषों को फंसाने का आरोप लगेगा। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होते ही बेटी की भी गिरफ्तारी संभव है।
पहले खुद को बताया था ‘एसिड अटैक की शिकार’
मुकुंदपुर की रहने वाली लड़की ने शुरुआत में पुलिस को बताया था कि जब वह कॉलेज जा रही थी, तब तीन लड़कों ने मोटरसाइकिल से उस पर एसिड फेंका। उसने दावा किया था कि उनमें से एक युवक जितेंद्र है, जो पिछले कई महीनों से उसका पीछा कर रहा था और एक महीने पहले दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। लड़की ने कहा था — “मैं न्याय चाहती हूं, इन लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।”
लेकिन पुलिस की फॉरेंसिक रिपोर्ट और CCTV जांच ने सारी कहानी पलट दी। यह साबित हुआ कि किसी ने भी उस पर हमला नहीं किया, बल्कि उसने खुद घर से टॉयलेट क्लीनर लाकर अपने ऊपर डाला था।
कैसे उजागर हुई साजिश?
पुलिस ने घटनास्थल से सीसीटीवी फुटेज, फोन रिकॉर्ड और गवाहों के बयान जुटाए। इन सबूतों से यह स्पष्ट हुआ कि हमले के वक्त कथित आरोपी मौके पर थे ही नहीं। जब पुलिस ने लड़की के पिता से कड़ी पूछताछ की, तो वह टूट गया और संपूर्ण साजिश का खुलासा कर दिया।
फर्जी एसिड अटैक की साजिश पर कानूनी शिकंजा
अब दिल्ली पुलिस दोनों के खिलाफ बीएनएस (Bharatiya Nyaya Sanhita) के तहत झूठा मुकदमा दर्ज करने, आपराधिक षड्यंत्र, सबूतों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर अपराधों में मामला दर्ज कर रही है।
यह मामला एक बड़ी सीख है कि झूठे केस न सिर्फ निर्दोषों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि वास्तविक पीड़ितों की न्याय प्रक्रिया को भी प्रभावित करते हैं।


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