करेवा विवाह: पति की मौत के बाद जेठ या देवर से शादी, संतान को संपत्ति में अधिकार मिलेगा या नहीं?

करेवा विवाह, मुख्यतः हरियाणा और पंजाब में प्रचलित एक परंपरा है, जिसमें विधवा की शादी परिवार के सदस्य से की जाती है। दिल्ली हाईकोर्ट इस प्रथा से जन्मे बच्चों के कानूनी अधिकारों की जांच कर रहा है।

करेवा विवाह: पति की मौत के बाद जेठ या देवर से शादी, संतान को संपत्ति में अधिकार मिलेगा या नहीं?
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली हाईकोर्ट में हाल ही में एक अहम मामला सामने आया है, जो "करेवा विवाह" नामक परंपरा और उससे जुड़े कानूनी अधिकारों पर केंद्रित है। कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि करेवा विवाह से जन्मे बच्चों को वही कानूनी अधिकार मिलें, जो अन्य वैध विवाहों से पैदा हुए बच्चों को प्राप्त होते हैं।

क्या है करेवा विवाह?
करेवा विवाह एक प्राचीन प्रथा है, जो मुख्यतः हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्रचलित है। इसमें एक व्यक्ति अपने बड़े भाई की विधवा पत्नी से शादी करता है। इसका उद्देश्य परिवार को एकजुट रखना, विधवा को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देना, और संपत्ति के बंटवारे को रोकना है।

कानूनी स्थिति और विवाद
हिंदू विवाह अधिनियम 1955 में करेवा विवाह का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन इसे कुछ मामलों में मान्यता दी गई है। हालांकि, यह विवाह विधवा की मर्जी के बिना होने के कारण कई बार महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों पर सवाल खड़े करता है।

दिल्ली हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
हाईकोर्ट ने इस प्रथा से जुड़े बच्चों के कानूनी अधिकारों की जांच का निर्णय लिया है। यह मामला समाज की परंपराओं और कानूनी व्यवस्था के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।