बंगाल की सच्चाई: राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ने क्यों कहा 'मेरी बेटी भी सुरक्षित नहीं'

राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य अर्चना मजूमदार ने पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। जानें, उन्होंने क्यों कहा, 'मेरी बेटी भी सुरक्षित नहीं।'

बंगाल की सच्चाई: राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ने क्यों कहा 'मेरी बेटी भी सुरक्षित नहीं'
National Commission for Women member Archana Mazumdar

पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य अर्चना मजूमदार के बयान ने चिंता की लहर पैदा कर दी है। उनका कहना है कि राज्य में लगातार बढ़ते अपराध, पुलिस की लापरवाही और राजनीतिक दबाव के चलते महिलाओं और बेटियों के लिए सुरक्षित माहौल नहीं बचा है।

आयोग की सख्त टिप्पणी: 'हर दिन डरावनी घटनाएं'
अर्चना मजूमदार ने कहा, एक मां और बंगाल की मतदाता होने के नाते मुझे लगता है कि यहां मेरी बेटी भी सुरक्षित नहीं है। राज्य में बलात्कार और हत्या की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं। अपराधियों को सजा मिलने के बजाय उन्हें बचाने की कोशिश की जाती है।

पुलिस की विफलता पर सवाल
कोलकाता रेप केस का उदाहरण देते हुए उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। यदि पुलिस पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा नहीं दे सकती, तो यह उनकी असफलता है। और यदि वे जानबूझकर जानकारी छिपा रहे हैं, तो यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।

राजनीति और अपराध का गठजोड़
महिला आयोग की सदस्य ने बंगाल की राजनीतिक स्थिति को भी जिम्मेदार ठहराया। राजनीतिक प्रभावशाली अपराधियों को सजा नहीं मिलती। वे बेखौफ होकर अपराध करते हैं। सत्तारूढ़ पार्टी के छात्र विंग से लेकर प्रशासन तक, हर जगह दबाव बनाया जाता है।

आयोग की मांग: अपराधियों पर सख्त कार्रवाई
महिला आयोग ने बंगाल सरकार से महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और दोषियों को तुरंत सजा दिलाने की अपील की है।