‘हिंदुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए’— BJP नेता नवनीत राणा के बयान से सियासी तूफान

बीजेपी नेता नवनीत राणा के जनसंख्या को लेकर दिए गए बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष और जनता की तीखी प्रतिक्रिया के बीच उन्होंने अपने बयान पर सफाई भी दी है।

‘हिंदुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए’— BJP नेता नवनीत राणा के बयान से सियासी तूफान
Navneet Rana

महाराष्ट्र की बीजेपी नेता नवनीत राणा एक बार फिर अपने बयान को लेकर तीखे राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई हैं। उन्होंने जनसंख्या को लेकर हिंदू समाज से जुड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए हिंदुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए। इस बयान में उन्होंने एक विशेष समुदाय की सोच का हवाला देते हुए ऐसी बात कही, जिसे विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने भड़काऊ करार दिया है। बयान सामने आते ही सियासी हलकों से लेकर आम जनता तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

विपक्ष और जनता की तीखी प्रतिक्रिया
नवनीत राणा के इस बयान पर विपक्ष ने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस तरह की बातें समाज को बांटने और धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाली हैं। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग नवनीत राणा की आलोचना करते दिखे, जहां कई यूजर्स ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और असंवैधानिक सोच बताया।

बयान के पीछे की दलील क्या है?
अपने बयान पर उठे विवाद के बीच नवनीत राणा ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने यह बात किसी मौलाना के बयान के संदर्भ में कही थी। उनका दावा है कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को सुना था, जो सार्वजनिक रूप से कई शादियों और बड़ी संख्या में बच्चों की बात करता है और और ज्यादा बच्चे न होने पर अफसोस जताता है। नवनीत राणा का कहना है कि इसी सोच के जवाब में उन्होंने हिंदू समाज से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की।

हिंदू समाज को लेकर नवनीत राणा की अपील
बीजेपी नेता ने आगे कहा कि जब कुछ लोग भारत में रहकर ज्यादा बच्चे पैदा कर देश की पहचान बदलने की सोच रखते हैं, तो हिंदू समाज को भी पीछे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हिंदू समाज एक या दो बच्चों तक ही सीमित क्यों रह जाए। इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है और जनसंख्या जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

उद्धव ठाकरे पर सीधा राजनीतिक हमला
इसी बीच नवनीत राणा ने शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे की राजनीति अब मजबूरी और कमजोरी की पहचान बन चुकी है। स्थानीय निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारने तक में असफल रहे हैं और उनके साथ जाने वाला कोई भी राजनीतिक दल कमजोर प्रदर्शन करेगा।