मेरठ में टोल प्लाजा बवाल: जवान से मारपीट के विरोध में गुस्साए ग्रामीणों का हंगामा
मेरठ के भूनी टोल प्लाजा पर सेना के जवान कपिल और उनके भाई शिवम के साथ मारपीट के बाद गोटका के ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सोमवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने टोल प्लाजा पर कब्जा कर लिया, तोड़फोड़ और नारेबाजी की। उन्होंने टोल कर्मचारियों की बर्खास्तगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने कई आरोपियों को हिरासत में लिया, लेकिन ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, धरना और आंदोलन जारी रहेगा। जानें पूरा मामला।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरूरपुर थाना क्षेत्र स्थित भूनी टोल प्लाजा रविवार को उस समय सुर्खियों में आ गया, जब यहां सेना के जवान कपिल और उनके चचेरे भाई शिवम के साथ टोल कर्मचारियों ने कथित तौर पर मारपीट कर दी। जवान कपिल मेरठ के गांव गोटका निवासी हैं। इस घटना से ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा और सोमवार को मामला बड़े विरोध-प्रदर्शन में बदल गया।
सोमवार को गोटका गांव से सैकड़ों ग्रामीण भूनी टोल प्लाजा पर पहुंच गए। देखते ही देखते टोल प्लाजा पर भारी हंगामा शुरू हो गया। ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए टोल पर कब्जा कर लिया और किसी भी वाहन से शुल्क वसूलने नहीं दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स और खिड़कियां तोड़ डालीं, जिससे वहां अफरातफरी मच गई। कई टोल कर्मचारी मौके से भाग निकले।
ग्रामीणों का आरोप: 'जवान पर हमला देश का अपमान
ग्रामीणों ने कहा कि देश की सुरक्षा करने वाले जवानों के साथ इस तरह का व्यवहार करना अत्यंत शर्मनाक और अस्वीकार्य है। ग्रामीणों की मांग है कि टोल कर्मचारियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। टोल प्रबंधन पर भी जवाबदेही तय की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जवान की सुरक्षा नहीं हो सकती, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने की कोशिश की और कई आरोपियों को हिरासत में लिया। लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने टोल प्रबंधन और प्रशासन पर ढिलाई बरतने का आरोप लगाया।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई और कर्मचारियों की बर्खास्तगी नहीं होती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। उन्होंने यह भी साफ कहा कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और उग्र होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।


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