सऊदी अरब अमेरिका के साथ कर सकता है म्यूचुअल डिफेंस डील, पाकिस्तान के समझौते की तरह होगी रणनीति
सऊदी अरब अमेरिका के साथ म्यूचुअल डिफेंस डील करने की तैयारी में है, पाकिस्तान समझौते जैसी रणनीति लागू होगी। पढ़ें क्राउन प्रिंस के व्हाइट हाउस दौरे और मध्य-पूर्व में इस डील का महत्व।
हाल ही में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इस डील के तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे दूसरे देश पर भी हमला माना जाएगा। यह केवल डिफेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सैन्य ट्रेनिंग, हथियारों की सप्लाई, संयुक्त अभ्यास और तकनीकी सहयोग की संभावनाएँ भी शामिल हैं।
अगला लक्ष्य अमेरिका: मजबूत मुस्लिम राष्ट्र के रूप में पहचान
अब सऊदी अरब इसी तरह की डील अमेरिका के साथ करना चाहता है। फाइनैंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अगले महीने व्हाइट हाउस दौरे पर जा रहे हैं, और उम्मीद है कि इस दौरान समझौता फाइनल हो सकता है। यह डील कतर के हालिया अमेरिकी समझौते जैसी हो सकती है, जिसमें कहा गया था कि कतर पर किसी भी तरह का हथियारबंद हमला अमेरिका के लिए भी खतरा माना जाएगा।
अमेरिका और मध्य-पूर्व रणनीति
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा है कि किंगडम के साथ डिफेंस कोऑपरेशन क्षेत्रीय रणनीति की मजबूत नींव है। हालांकि, डील के डिटेल्स पर कोई टिप्पणी नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार, यह समझौता अमेरिका को मध्य-पूर्व में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने का अवसर देगा, जबकि सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा की गारंटी मिलेगी।
सऊदी-अमेरिका डील का उद्देश्य और रणनीति
सऊदी अरब लंबे समय से अमेरिका से ऐसी गारंटी चाहता रहा है, जैसी कतर को मिली थी। इसके पीछे मकसद यह भी है कि वाशिंगटन के जरिए सऊदी और इजराइल के बीच रिश्तों को सामान्य किया जा सके। इसी महीने, सऊदी ने न्यूक्लियर अर्सेनल वाले पाकिस्तान के साथ भी म्यूचुअल डिफेंस पैक्ट साइन किया है। अगर अमेरिका के साथ भी डील फाइनल होती है, तो यह सऊदी अरब की रक्षा और मध्य-पूर्व में रणनीतिक स्थिति दोनों को मजबूत करेगा।


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