नकली दवा मामले में बिहार के मंत्री दोषी, विपक्ष हमलावर — इस्तीफे और जांच की उठी मांग
बिहार के नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा 15 साल पुराने नकली दवा घोटाले में राजस्थान कोर्ट से दोषी करार। विपक्ष ने इस्तीफे और जांच की मांग की। जानिए पूरा मामला और अब तक की कार्रवाई।
बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास मंत्री और दरभंगा जिले के जाले से बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा को राजस्थान की एक अदालत ने 15 साल पुराने नकली दवा घोटाले में दोषी ठहराया है।
यह मामला सितंबर 2010 का है, जब राजस्थान के राजसमंद जिले में कंसारा ड्रग्स डिस्ट्रीब्यूटर्स पर औषधि निरीक्षण हुआ। जांच में सामने आया कि ऑल्टो हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड, जिसके निदेशक जीवेश मिश्रा हैं, और दो अन्य कंपनियों द्वारा सप्लाई की गई सिप्रोलाइन-500 टैबलेट घटिया और मिलावटी पाई गई।
राजसमंद की अदालत ने 4 जून 2025 को इस मामले में जीवेश मिश्रा सहित 9 लोगों को दोषी करार दिया। 1 जुलाई 2025 को सुनवाई के दौरान अदालत ने उन्हें 7,000 रुपये जुर्माना और अच्छे आचरण का हलफनामा देने के बाद रिहा कर दिया।
विपक्ष ने तेज किया हमला — इस्तीफे और जांच की मांग
राजस्थान कोर्ट के फैसले के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर जबरदस्त हमला बोला है। कांग्रेस नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख राजेश राठौर ने कहा, ऐसे व्यक्ति को मंत्री बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए और बीजेपी को भी उन्हें पार्टी से बाहर करना चाहिए।
कांग्रेस ने नकली दवा नेटवर्क की गहराई से जांच की मांग की और आरोप लगाया कि इस घोटाले से आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ हुआ।
पप्पू यादव ने नीतीश सरकार को घेरा
पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की कि वे तुरंत मंत्री को बर्खास्त करें। उन्होंने आरोप लगाया, मंत्री नकली दवा माफिया हैं। नकली दवाएं बेचकर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया। जाले के लोग आने वाले चुनाव में इन्हें सबक सिखाएं।
मंत्री की सफाई का इंतजार
इस पूरे विवाद के बीच अब तक खुद जीवेश मिश्रा या बीजेपी की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। इस पर बिहार की राजनीति गरमा गई है और विपक्ष ने इसे नीतीश सरकार की नैतिकता पर सवाल बताया है।


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