Ax-4 मिशन: राकेश शर्मा के बाद अब शुभांशु शुक्ला, भारत की अंतरिक्ष उड़ान को नई ऊंचाई देने को तैयार

भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 10 जून को Ax-4 मिशन के तहत अंतरिक्ष की उड़ान भरेंगे। यह भारत की दूसरी मानव अंतरिक्ष यात्रा होगी।

Ax-4 मिशन: राकेश शर्मा के बाद अब शुभांशु शुक्ला, भारत की अंतरिक्ष उड़ान को नई ऊंचाई देने को तैयार

भारत एक बार फिर अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाने जा रहा है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, Ax-4 मिशन के अंतर्गत 10 जून 2025 को अंतरिक्ष के लिए रवाना होंगे। यह प्रक्षेपण भारतीय समयानुसार शाम 5:52 बजे अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित NASA के कैनेडी स्पेस सेंटर से किया जाएगा।

इस मिशन के जरिए भारत, राकेश शर्मा के 1984 के ऐतिहासिक सफर के बाद, एक बार फिर मानव अंतरिक्ष उड़ान में सक्रिय भागीदारी कर रहा है।

कौन हैं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला?
लखनऊ निवासी 40 वर्षीय शुभांशु शुक्ला का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता शंभू दयाल शुक्ला और माता आशा शुक्ला हैं। उन्होंने सिटी मोंटेसरी स्कूल, अलीगंज से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की और कारगिल युद्ध से प्रेरित होकर NDA की परीक्षा दी।
- 2006 में भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में शामिल हुए
- 2000+ उड़ान घंटे का अनुभव
- उड़ाए गए विमान: Su-30MKI, MiG-21, Jaguar, Dornier, An-32
- वर्ष 2019 में ISRO के गगनयान मिशन के लिए चयनित
- रूस के यूरी गागरिन ट्रेनिंग सेंटर में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण प्राप्त किया
- मार्च 2024 में ग्रुप कैप्टन पद पर पदोन्नत हुए

Ax-4 मिशन क्या है?
- यह SpaceX का 15वां मानव मिशन है और 53वां Dragon मिशन
- इस मिशन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करना है

 इस मिशन में कुल चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं:
- शुभांशु शुक्ला (भारत)
- पेगी व्हिटसन (कमांडर, USA)
- स्लावोस उज्नांस्की (पोलैंड)
- टिबोर कापू (हंगरी)

ISS पर क्या करेंगे शुभांशु शुक्ला?
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर शुभांशु जैविक और भौतिक विज्ञान से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रयोग करेंगे, जिनमें शामिल हैं:
- पौधों के बीजों पर सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव
- मानव शरीर पर Zero Gravity के असर का अध्ययन
- बायोमेडिकल टेस्ट्स और माइक्रोबायोलॉजिकल रिसर्च

भारत का निवेश
भारत सरकार ने इस मिशन पर अब तक 548 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसमें शुभांशु शुक्ला के साथ उनके बैकअप ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर की ट्रेनिंग भी शामिल है।

शुभांशु शुक्ला का बयान
“शुरुआत में मेरा सपना सिर्फ उड़ान भरना था, लेकिन अंतरिक्ष यात्री बनने का रास्ता बाद में खुला। मैं खुद को बेहद भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे जीवन भर उड़ान भरने का अवसर मिला और फिर मुझे अंतरिक्ष यात्री बनने का मौका मिला।”

भारत के लिए क्या मायने रखता है यह मिशन?
इस मिशन के सफल होने पर भारत एक बार फिर से अंतरिक्ष जगत में मानव मिशन के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को स्थापित करेगा। यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच वैज्ञानिक सहयोग का भी प्रतीक है और भविष्य में गगनयान मिशन की नींव को और मजबूत करेगा।